Home Kurukshetra News वसुंधरा राजे सिंधिया खेमे के पूर्व मंत्री रोहिताश्व शर्मा के बाद अकील अहमद का 6 साल के लिए निष्कासन

वसुंधरा राजे सिंधिया खेमे के पूर्व मंत्री रोहिताश्व शर्मा के बाद अकील अहमद का 6 साल के लिए निष्कासन

by ND HINDUSTAN
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अकील अहमद के अलावा अन्य 7 को कारण बताओ नोटिस,10 दिनों के भीतर देना होगा जवाब

न्यूज डेक्स राजस्थान

धौलपुर। पिछले चंद दिनों के भीतर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया खेमे के दूसरे नेता पर आज निष्कासन की गाज गिरी है। पिछले माह पूर्व मंत्री रोहिताश्व शर्मा और अब भाजपा ने अनुशासनहीनता और सभापति के चुनाव में क्रास वोटिंग का आरोप लगाकार नगर परिषद के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अकील अहमद को अगले 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। अकील अहमद के अलावा अन्य सात को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 10 दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने की हिदायत दी गई है।

वहीं अकील अहमद का ने स्थिति स्पष्ट करते हुए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि निष्कासन की जो कार्रवाई की गई है उससे कोई फर्क नहीं पड़ा,क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री वंसुधरा राजे सिंधिया भारतीय जनता पार्टी में हैं और वही हमारी नेता हैं।काबिलेजिक्र है कि अकील अहमद भाजपा के पुराने कट्टर समर्थक रहे हैं और भाजपा की टिकट पर तीन बार पार्षद बने थे,लेकिन हाल का चुनाव उन्होंने आजाद उम्मीदवार के रुप में लड़ा था और चौथी बार पार्षद चुने गए थे।

इसके बाद पिछले दिनों वंसुधरा राजे सिंधिया खेमे के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री रोहिताश्व शर्मा को भाजपा द्वारा 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था। इस कार्रवाई का अकील अहमद ने विरोध करते हुए संगठन पर टिप्पणी की थी। निर्दलीय चुनाव लड़ने के बाद से उन्हें बागी बताने वालों को अकील अहमद बार बार एक ही जवाब दे रहे हैं कि वह मन से भाजपाई हैं। अकील अहमद साथ ही यह भी आरोप लगाते रहे हैं कि भाजपा में कुछ इस तरह के लोग आ चुके हैं,जिनका भाजपा की विचारधारा से कोई लेना देना नहीं है।

इस मामले में भाजपा के संभाग प्रभारी मुकेश दधीचि ने चुनाव प्रचार में बाहर होने की बात कही है,जबकि भाजपा जिला प्रधान श्रवण वर्मा ने संगठन के अन्य वरिष्ठों की तरह चुप्पी साधते हुए पूरे मामले में अनभिज्ञता जताई है। वहीं सूत्रों का कहना है कि आरोप है कि निकाय चुनाव में पूर्व नेता प्रतिपक्ष और अन्य पार्षदों ने अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ़ चुनाव लड़ने और सभापति चुनाव में क्रास वोटिंग कर संगठन को कमजोर करने का प्रयास किया।

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