चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग ने पत्र लिख कर की श्रीभगवान फोगाट के प्रयासों की सराहना
2019,2020,2021 और 2022 में भी आजाद हिंद फौज के गुमनाम सिपाहियों के विषय में पत्र लिख चुके हैं फोगाट
एक दशक से नेताजी सुभाष चंद्र बोस के गुमनाम सहयोगियों के हक के लिए संघर्षरत हैं श्रीभगवान फौगाट
न्यूज डेक्स संवाददाता
रेवाड़ी। गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों का रिकॉर्ड आजाद हिंद फौज नॉमिनल रोल राष्ट्रीय अभिलेखागार कार्यालय से ढूंढकर उन्हें स्वतंत्रता सेनानी दर्जा दिलाने के लिए एक दशक से प्रयासरत श्रीभगवान फोगाट अधिकारियों के रवैए से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि सरकार की मंशा तो गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवारों को उचित सम्मान देने की दिखती है,मगर विषय पर गंभीरता काम नहीं दिखाई दे रहा।फोगाट ने बताया है कि सरकार द्वारा सभी उपायुक्तों को पत्र लिखा है। इस पत्र में दिनांक 17 सितंबर 2019 का विषय लिखा है। इसके अनुसार नेता जी सुभाष चंद्र बोस की सेना गुमनाम सिपाहियों का आजाद हिंद फौज का रिकॉर्ड परिवारों तक पहुंचाने का जनहित अनुरोध है।
उन्होंने बताया कि 2019 के पत्र के उपरांत पुनः बार बार फिर से आज तक भी सभी उपायुक्तों को पत्र दिनांक 14 जनवरी 2020 व पत्र दिनांक 22 जुलाई 2021 एवं पत्र दिनांक 13 सितंबर 2022 अनुसार राज्य प्रशासन को इस विषय का स्मरण कराया गया।
आजादी के अमृत महोत्सव साल में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा गुमनाम नायकों का रिकॉर्ड इतिहास तैयार करने का दायित्व देश के इतिहासकारों को दिया गया है एवं राज्य के डा. रवि प्रकाश इतिहास विभागाध्यक्ष चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी को यह दायित्व दिया गया। इतिहास ऐसे नायकों का आजाद हिंद फौज नॉमिनल रोल राष्ट्रीय अभिलेखागार रिकॉर्ड उनको भी दिया गया है। काबिलेगौर है कि यूनिवर्सिटी के इतिहासकार द्वारा भी श्री भगवान फोगाट द्वारा किए गए। सहयोग के लिए पत्र लिख कर आभार व्यक्त किया है। इसमें लिखा है कि आपके अमूल्य सहयोग व योगदान से विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग को सौंपा गया यह कार्य सरल व आसान हो गया है।आपने आजाद हिंद फौज से संबंधित जो महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई वह सराहनीय है। अतः विश्वविद्यालय का इतिहास विभाग आपके इस अविस्मरणीय कार्य हेतु आपका आभार व्यक्त करता है।
फोगाट द्वारा बताया गया कि उन्होंने आज तक अनेकों बार इस विषय में नियमों के अनुसार कार्यवाही न होने कि शिकायत भी प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से की है, लेकिन अब वह राजनेताओं व प्रशासन के सक्षम अधिकारियों के सामने सैकड़ों बार पक्ष रख थक गये हैं। इसलिए उन्होंने स्वयं ऐसे नायकों का इतिहास रिकॉर्ड को उनके घर परिवारों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है, लेकिन अफसोस है कि लगभग ऐसे सैनिकों के गांव के गौरव पट्टों पर अंग्रेजी सेना शहीद जवान होने का नाम लिखा मिलता है,जबकि ब्रिटिश आर्मी को छोड़ कर ही यह वीर सपूत भारत की आजादी के लिए नेता जी सुभाष चंद्र बोस के सहयोगी बन गए थे।इसके बाद उन्हें कई प्रकार की यात्ननाएं सहनी पड़ी थी। फोगाट का कहना है कि ब्रिटिश सेना से बग़ावत कर नेताजी का सहयोगी बनने के कारण अंग्रेजों ने इनकी सेवाओं को मानने की बजाए इनका रिकार्ड ध्वस्त कर दिया था और जो पकड़े गए उन्हें यातनाएं दी थी। इन वीर सपूतों को ना अंग्रेजी सेना ने स्वीकार किया और ना ही आजादी के बाद भारतीय सरकारों ने उचित सम्मान दिया। अब भी यह सब इसलिए हो रहा है,क्योंकि जिला प्रशासन भी ऐसे नायकों का केस फाइल पर गंभीरता से काम नहीं कर रही है।
फौगाट ने यह भी बताया कि ऐसे सैनिकों का रिकॉर्ड ढूंढने के लिए अनेकों संस्थाओं से उनको सार्वजनिक तौर पर सम्मान मिला है, लेकिन आज तक ऐसे सैनिकों के परिवारों तक इतिहास रिकॉर्ड आजाद हिंद फौज नहीं पहुंच पाया है एवं कुछ जिला प्रशासन के आफिस में अब ऐसे सैनिकों का रिकॉर्ड आजाद हिंद को ढूंढना अधिकारियों के लिए भी आसान नहीं है, क्योंकि अधिकारियों के समय समय पर विभाग भी बदल गए है और रिकॉर्ड फाइलों में धूल फांक रहा है। अब संयुक्त सचिव स्वतंत्रता सेनानी विभाग से मिलकर चंडीगढ़ में पक्ष रखा है, जिससे लगा है कि वह जरूर इस विषय में आगामी कार्यवाही करेंगे।